मिलना भी खूबसूरत था...
बिछड़ना भी यादगार रहा...
तुम पास थे तो इश्क़ था...
दूर हुए तो इंतज़ार रहा...
Ashish....
ना जाने कितने लोग मिले इस सफ़र में...
कुछ दोस्त बने...कुछ इश्क़ बन गए...
कुछ याद बनकर रह गए दिल में...
और कुछ बिना कहे ही बिछड़ गए...
आज रास्तों से नहीं...खुद से मिलने निकलूँगा... भीड़ में नहीं....अपने भीतर की ख़ामोशी में टहलूँगा... एक कप चाय... खुला आसमान...और दिल में उमड़...
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