Tuesday, 8 September 2026


हर शाम ऑफिस से घर तो लौट आता हूँ...
मगर सुकून आज भी कहीं रास्ते में छूट जाता है...

आशीष....

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आज रास्तों से नहीं...खुद से मिलने निकलूँगा... भीड़ में नहीं....अपने भीतर की ख़ामोशी में टहलूँगा... एक कप चाय... खुला आसमान...और दिल में उमड़...