Wednesday, 26 January 2022

सफ़ेद चादर...

आओ चलते हैं...कहीं दूर...बहुत दूर...
जहां कोई भी ना हो...
तुम हो हम हो...और ये ऊंची ऊंची पहाड़ की चोटियां...
जो बर्फ की चादर को लपेटकर...अपनी खूबसूरती का इजहार कर रही है...
दिल करता है... ख़ुद को भूल जाऊं...
और समा जाऊं...इन ख़ूबसूरत पहाड़ों के बीच में...

इन ठंडी हवाओं को सुनो ना...
जो पहाड़ों से टकराकर...
बर्फ की चोटियों से गुजरकर...
हमसे कुछ कह रही है....
हमें एहसास करा रही है अपने होने का...
इन ख़ूबसूरत वादियों से तो किसी को भी प्यार हो जाए...
लेकिन आसान कहां है तुमसे मोहब्बत करना...

आशीष गुप्ता...

Tuesday, 7 September 2021

अधूरी मोहब्बत....


तुम्हें देखता हूं तो मेरी आंखें भी झुक जाती है...
क्या ये मोहब्बत नहीं है...
ना देखूं तो मेरा दिल भी तड़प सा जाता है...
क्या ये मोहब्बत नहीं है...
जरूरी है क्या... की हर मोहब्बत का इजहार करूं...
कभी तुम भी मेरी खामोशियों को समझो...
जो खामोश होकर भी बहुत कुछ बयां कर जाती है...
सुना है तुम किताब पढ़ती हो...
कभी मेरा चेहरा भी पढ़कर देखो ना...
आंखों में झांक कर देखो... तो पता चलेगा...
की कितनी मोहब्बत है तुमसे...
तुम्हारे मोहब्बत के दरिया में... इस कदर डूबा हुआ हूं मैं कि...
ना तो इसका कोई किनारा ही मिल रहा है...
और ना ही कोई मंजिल...
हर तरफ़ बस तेरी यादों की तन्हाई है...
और इस तन्हाइयों में...
मुझे तेरा इंतजार...

आशीष गुप्ता...

Saturday, 28 August 2021

मेरी ज़िन्दगी...



ये मेरी ज़िन्दगी मैं तुझे क्या लिखूं...
मोहब्बत लिखूं की इबादत लिखूं...
शब्द नहीं है बयां करने को...
तुम्हारी ये जो प्यारी सी हसीं है...
वहीं मेरी ख़ुशी है...
तुम्हारा ज़िक्र ही मेरा फ़िक्र है....
तुम बिन मैं अधूरा हूं...
तुम हो तो मैं पूरा हूं...


आशीष गुप्ता...

Tuesday, 20 July 2021

मोहब्बत...

कौन कहता है कि हमें इश्क़ करना नहीं आता है...
हमने तो मोहब्बत में ख़ुद को बर्बाद कर के देखा है...

आशीष गुप्ता....

Wednesday, 2 June 2021

जिम्मेदारियां...

कुछ ख़्वाब है जो हक़ीक़त भी नहीं होती
और कुछ जिम्मेदारियां है जो सोने भी नहीं देती...


आशीष गुप्ता....

Wednesday, 14 April 2021

मोहब्बत...

हम वो आशिक़ हैं.... जो हर किसी से मोहब्बत कर बैठें...
मोहब्बत में इतना दर्द मिला... तो ख़ुद से ही मोहब्बत कर बैठें....


Sunday, 11 April 2021

मोहब्बत...



मेरी मोहब्बत पे कीचड़ उछालने वालों...
कभी ख़ुद को आईने में देखा है क्या...
मैं जिस भी गली से गुज़र जाऊं उधर मोहब्बत की बरसात हो जाती है...
तुमने कभी आसमां को भीगते हुए देखा है क्या...

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...