Sunday, 29 April 2018

प्यार इश्क़ और मोहब्बत

हमने तो इश्क़ का नाम ही ना सुना था...
तुम जो मिले तो ज़िन्दगी मोहब्बत सी हो गयी...
अज़नबी थे प्यार, इश्क़ और मोहब्बत के नाम से भी...
तुम जो आये तो रातोँ की नींद भी कहीं खो सी गयी...

सरीफ़ तो हम भी थे दुनिया के इस सराफत के बाज़ार में...
तुमने जो निगाहों से वॉर किया बदनाम हम भी हो गए...
क्या फर्क पड़ता है गर मेरे नाम के आगे तेरा नाम जुड़ जाये...
कुछ पल के लिए ही सही मसहूर तुम भी और मसहूर हम भी हो गए...


आशीष गुप्ता

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