Thursday, 7 November 2019

सपनें...

कुछ सपने हक़ीक़त भी नहीं होते...
मगर रात को सोने भी नहीं देते....

आशीष गुप्ता...

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आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...