कुछ पुराने एहसास मिल जाते हैं....
ख़ामोश शामों में...
कई अधूरे जवाब मिल जाते हैं...
ज़िंदगी की भागदौड़ में...
थोड़ा ठहर जाना भी ज़रूरी है...
क्योंकि सुकून अक्सर वहीं मिलता है...
जहाँ दो किनारे मिल जाते हैं...
आशीष.....
आज रास्तों से नहीं...खुद से मिलने निकलूँगा... भीड़ में नहीं....अपने भीतर की ख़ामोशी में टहलूँगा... एक कप चाय... खुला आसमान...और दिल में उमड़...
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