रात थोड़ी ठंडी हो...
आसमान में चाँद अपनी...पूरी रोशनी बिखेर रहा हो...
सड़कें ख़ामोश हों....हवा तुम्हारे बालों से खेल रही हो...
और हम बिना किसी मंज़िल के..
बस साथ चलते रहें...
न कोई जल्दी हो....न किसी बात की फ़िक्र....
बस तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में हो..
कुछ बातें हों....कुछ ख़ामोशियाँ हों...
और हर ख़ामोशी में भी सिर्फ़ तुम्हारा एहसास हो....
उस रात अगर वक़्त ठहर जाए...
तो शायद ज़िंदगी से फिर कभी कोई शिकायत न रहे...
काश कुछ रातें ऐसी भी हों...
जो सुबह होने की जल्दी न करें…
जहाँ वक़्त नहीं...सिर्फ़ एहसास चलें...
और हर पल यही लगे कि यही ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा है....
आशीष.....
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