मैंने लिखना...
इसलिए नहीं सीखा कि मशहूर हो जाऊँ...
मैंने लिखना...
इसलिए चुना ताकि ख़ुद से दूर न हो जाऊँ...
मेरे अल्फ़ाज़...
किसी महफ़िल के मोहताज नहीं...
ये मेरे अकेलेपन के सबसे अच्छे हमसफ़र हैं....
आशीष
तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....
No comments:
Post a Comment