Wednesday, 27 November 2019

तेरा नाम...

हर लम्हा ठहर सा जाता है तेरे आने के बाद...
वो चांद भी शरमा सा जाता है तुझे देखने के बाद...
बनाने वाले ने तुझे क्या सोचकर बनाया होगा...
मेरी धड़कन भी रुक सा जाता है तेरा नाम लेने के बाद...

आशीष गुप्ता...

मंजिल...

रास्ता कितना भी कठिन कियुं ना हो...
बस मंजिल ख़ूबसूरत होनी चाहिए....

आशीष गुप्ता...

मोहब्बत नशा...

मैंने हर नशे को आजमाया वो फीका ही निकला...
फिर नशा किया मोहब्बत का, कसम से झकझोर दिया...

आशीष गुप्ता...

मंजिल...

ज़िन्दगी की जद्दोजहद में परेशानियां हो कितना भी...
जमीं से लेकर आसमां तक उचाईं या हो कितना भी...
किसी में इतना दम नहीं की मेरे हौसले की उड़ान को रोक ले...
मंजिल तक तो मै पहुंच ही जाऊंगा, रास्ते में कांटे बिछा दो कितना भी...

आशीष गुप्ता...

दूसरा इश्क़...

एक बार मोहब्बत किया तो शायर बना दिया....
पता नहीं इस बार के मोहब्बत का अंजाम क्या होगा...

आशीष गुप्ता...

लिखने का हुनर...

लिखने का हुनर तो हर किसी में होता है... जनाब...
बस एक बार मोहब्बत कर के तो देखो...

तुम्हारे शब्द खुद ब खुद गज़ल बन जाएगी...
बस एक बार कलम उठा कर के तो देखो...

आशीष गुप्ता...

चेहरा...

चेहरा तो चेहरा मुझे तो तेरे नाम को लोग भी अच्छे लगते है....

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...