तुम अदालत हो तो हम भी गुनहगार हैं...
तुम जज हो तो हम ही सज़ा के हकदार हैं...
आशीष गुप्ता...
तुम अदालत हो तो हम भी गुनहगार हैं...
तुम जज हो तो हम ही सज़ा के हकदार हैं...
आशीष गुप्ता...
चलो आज मै कहता हूं.... हां मैंने मोहब्बत किया है तुमसे...
एक बार नहीं... कई बार मोहब्बत किया है तुमसे...
कभी तुम पूछते तो मैं बताता...कितनी मोहब्बत है तुमसे....
जान क़दमों पे रख देता तुम्हारे और कहता... इतनी मोहब्बत है तुमसे....
आशीष...
मीठा अगर ज़हर भी हो तो पीने में मज़ा आता है...
इश्क़ अगर सच्चा हो तो इश्क़ करने में मज़ा आता है...
आशीष....
सोचते-सोचते कब शाम हो गयी, पता ही नही चला...
देखते-देखते पुराना साल कब नया साल हो गया, पता ही नही चला...
जब नया साल आ ही गया है तो, खुल कर खूब एन्जोय करते है...
दोस्तों क साथ मिलकर थोड़ी मुलाकात करते हैं...
पुरानी यादें, पुराने दोस्त, हमेशा की तरह आज भी वही रहेंगे...
नया दिन बदला है, नई तारीख बदली है...नया साल बदला है...
मगर हमारे दोस्ती निभाने का अंदाज़ हमेशा की तरह आज भी वही रहेगा...
शुक्रगुजार हैं हम उस ज़िन्दगी का, जिनसे ज़िन्दगी में एक नया मोड़ आया है...
मेरे लिए मेरे घर से, मेरे अपनो का प्यार आया है...
यह साल मेरे लिए कुछ खास बन रहा है...
आप जैसा दोस्त इस साल मिल रहा है...
कुछ दोस्त मिले तो, कुछ दोस्त बिछड़ गए इस साल...
कुछ सपने सच हुए तो, कुछ टूट गए इस साल...
वो दौर कुछ और था, ये दौर कुछ और है...
वो दिन कुछ और था, आज का दिन कुछ और है...
अब तो साल भी नया है, दिन भी नया है...
ज़िन्दगी को जीने का एहसास भी नया है ...
मंजिल भी नया है, रास्ता भी नया है...
अपने मुकाम तक पहुँचने के लिए, हमारा अंदाज भी नया है...
वो दिन भी आयेगा, जब दुनिया याद करेगी...
इस बन्दे को दुनिया सलाम भी करेगी...
आशीष गुप्ता....
सोचते-सोचते कब शाम हो गयी, पता ही नही चला...
देखते-देखते पुराना साल कब नया साल हो गया, पता ही नही चला...
जब नया साल आ ही गया है तो, खुल कर खूब एन्जोय करते है...
दोस्तों क साथ मिलकर थोड़ी मुलाकात करते हैं...
पुरानी यादें, पुराने दोस्त, हमेशा की तरह आज भी वही रहेंगे...
नया दिन बदला है, नई तारीख बदली है...नया साल बदला है...
मगर हमारे दोस्ती निभाने का अंदाज़ हमेशा की तरह आज भी वही रहेगा...
शुक्रगुजार हैं हम उस ज़िन्दगी का, जिनसे ज़िन्दगी में एक नया मोड़ आया है...
मेरे लिए मेरे घर से, मेरे अपनो का प्यार आया है...
यह साल मेरे लिए कुछ खास बन रहा है...
आप जैसा दोस्त इस साल मिल रहा है...
कुछ दोस्त मिले तो, कुछ दोस्त बिछड़ गए इस साल...
कुछ सपने सच हुए तो, कुछ टूट गए इस साल...
वो दौर कुछ और था, ये दौर कुछ और है...
वो दिन कुछ और था, आज का दिन कुछ और है...
अब तो साल भी नया है, दिन भी नया है...
ज़िन्दगी को जीने का एहसास भी नया है ...
मंजिल भी नया है, रास्ता भी नया है...
अपने मुकाम तक पहुँचने के लिए, हमारा अंदाज भी नया है...
वो दिन भी आयेगा, जब दुनिया याद करेगी...
इस बन्दे को दुनिया सलाम भी करेगी...
आशीष गुप्ता....
हां मै स्त्री हूं...
मै ही तुम्हारा कल हूं... मै ही तुम्हारा भविष्य हूं...
मै ही पालनहार हूं...मै ही इस सृष्टि का निर्माण हूं...
मै ही मां हूं... मै ही बहन हूं...
मै ही पत्नी हूं...कियोंकी मै ही स्त्री हूं...
मै ही पेड़ हूं... मै ही छाव हूं...
मै ही पर्वत हूं... मै ही आकाश हूं...
मै कमज़ोर नहीं...मै लाचार नहीं...
मै कोई जीत नहीं...कोई हार नहीं...
मै ही त्याग हूं... मै ही बलिदान हूं...
मै ही शक्ति हूं... कयोंकि मै ही स्त्री हूं...
जो अग्नि से भी जीत जाए...वो ज्वाला हूं मै...
जो मृत्यु से भी लड़ जाए... वो नारी हूं मै...
ना टूटे कोई भी घर...ऐसी दीवार हूं मै...
जो सबको साथ लेकर चले... वो परिवार हूं मै...
जो कभी ना हो पराजित... वो अपराजिता हूं मै...
जो अपनों के लिए हर दर्द को भी सह जाए... वो स्त्री हूं मै....
आशीष गुप्ता....
आज प्यासा हूं इतना कि पूरा मैखाना ही पी जाऊं...
मगर क्या करूं तलब तेरे होंठों के जाम की है...
आशीष गुप्ता
आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...