Tuesday, 23 June 2020

सोचता हूं...

सोचता हूं कि तुम्हें लिखूं...
फिर सोचता हूं कि आख़िर क्या लिखूं...

आशीष गुप्ता...................??😃

Monday, 15 June 2020

तनहाई

हर बात को दिल में दबा के रखने से क्या फायदा...
ज़िन्दगी मिली है जीने के लिए... यूं अकेले रोने क्या फायदा...
कोई अपना ना सही तो... खुद को ही हमसफ़र बना लो...
यूं टूट कर बिखर जाने से क्या फायदा...

आशीष गुप्ता...

Monday, 18 May 2020

खामोशियां

ज़रूरी नहीं कि हर बात का इजहार अल्फ़ाज़ से ही किया जाए...

कभी-कभी खामोशियां भी बयां कर जाती है अपने जज़्बात को...

आशीष गुप्ता...

Saturday, 9 May 2020

मां


इस दुनिया में जिसने मुझे...अपने पैरों पे खड़े होना सिखाया है...
उंगलियां पकड़कर जिसने मुझे... चलना सिखाया है...
जिंदगी की हर कठिनायों से मुझे डट कर... लड़ना सिखाया है...
वो मेरी मां ही हैं जिसने मुझे... जिंदगी को जीना सिखाया है...
उनके इस एहसान इस ममता को मै... ज़िन्दगी भर ना चुका पाऊंगा...
लूंगा सात जन्म लेकिन फिर भी... ना उतार पाऊंगा...

आशीष गुप्ता

Monday, 13 April 2020

आग का दरिया

तुम मेरे इतना करीब मत आओ... जल जाओगे...
मै आग का दरिया हूं...तुम खांक हो जाओगे...
मेरी खामोशियों को तुम... कमज़ोरी मत समझना...
दिल में इतना समंदर भरा है कि... किनारे पे ही डूब जाओगे...

आशीष गुप्ता...

ख़ूबसूरत


ये मासूम सा चेहरा...बहकी फिजाएं...
उठे जो नज़र तेरी...कसम से घायल ही कर जाए...
लगता है जैसे... कोई मूरत हो तुम...
बहुत ख़ूबसूरत...बहुत ख़ूबसूरत हो तुम...

आंखों में काजल है... होठों पे लाली है...
लड़की ख़ूबसूरत है...तू लगती बड़ी प्यारी है...
जन्नत से अाई जैसे...कोई परी हो तुम...
बहुत खूबसूरत...बहुत खूबसूरत हो तुम...

रेशम सी जुल्फों में...बादल का पहरा है...
तुम्हारी दिल की धड़कनों में... राज़ भी गहरा है...
उस रब की जैसे कोई...अमानत हो तुम...
बहुत ख़ूबसूरत...बहुत ख़ूबसूरत हो तुम...

शीशा सा चमकता...ये बदन है तुम्हारा...
लहरें भी छू ले तो... मिल जाए किनारा...
सावन की जैसे...पहली बरसात हो तुम...
बहुत ख़ूबसूरत...बहुत ख़ूबसूरत हो तुम....

आशीष गुप्ता...




प्यार

एक चाहत है कि तुम मेरे पास बैठों और मै तेरा दीदार करूं...
मेरे हाथों में तेरा हाथ हो और जी भर के तुझे प्यार करूं...

आशीष गुप्ता....

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...