तेरी मोहब्बत में हम शरीफ से बदमाश हो गए...
बेकसूर तो हम भी थे गुनहगार हो गए...
ये मेरी ज़िन्दगी मैं तुझे क्या लिखूं...
मोहब्बत लिखूं की इबादत लिखूं...
शब्द नहीं है बयां करने को...
तुम्हारी ये जो प्यारी सी हसीं है...
वहीं मेरी ख़ुशी है...
तुम्हारा ज़िक्र ही मेरा फ़िक्र है....
तुम बिन मैं अधूरा हूं...
तुम हो तो मैं पूरा हूं...
आशीष गुप्ता...
तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....