Monday, 3 March 2025

आज कल मुझे ख़्याल...बड़े अच्छे आते हैं...
सोता हूं तो... ख़्वाब बड़े अच्छे आते हैं...

नहीं यकीं तुम्हें तो...आज़मा कर देख लेना...
कोई मुझसे सवाल तो करें... जवाब बड़े अच्छे आते हैं...

आशीष गुप्ता....

Saturday, 1 March 2025

हां मुझे पसंद है....

हां मुझे पसंद है...

तुम्हारा मासूम सा चेहरा, जिसे देखकर मेरे दिन की शुरुआत होती है...

हां मुझे पसंद है...

तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान, जिसे देखकर  मेरे दिल को सुकून मिलता है...

हां मुझे पसंद है...

तुम्हारी झील सी आँखें, जिसमें बस डूब जाने का मन करता है...

हां मुझे पसंद है...

तुम्हारे माथे की बिंदिया... जो तुम्हारे सादगी को और खूबसूरत बनाती है...

हां मुझे पसंद है...

तुम्हारी आंखों का काजल, जो निगाहों से तीर छोड़ती हो..

हां मुझे पसंद है....

तुम्हारा रूठना, तुम्हारा मानना...

तुमसे बेवजह बात करना...

तुम्हें परेशान करना...और

तुम्हारा इंतजार करना...

हां मुझे पसंद है...तुम और सिर्फ तुम...

आशीष....

Tuesday, 4 February 2025

आज सुबह उठते ही तुम्हारा ख़्याल आया...
जुबां खुलते ही लबों पे तुम्हारा नाम आया...
सोया था जिसे याद कर नींद की आग़ोश में...
आज आया भी उसी का ख़्वाब बेहिसाब आया...

आशीष...

Thursday, 30 January 2025

हमने तह उम्र लगा दी तुम्हें अपना बनाने में...
और उसने एक पल में ही हमें अजनबी बना दिया...
Ashish.....

Wednesday, 8 January 2025

इज़हार

आज कुछ लिखते हैं...
कुछ दिल की बात, कुछ मन की बात...
कुछ एहसास, कुछ प्यार, कुछ जज़्बात...वो कुछ शब्द जो तुमसे कहना था...वो बात जो तुमसे कभी मैं कह नही पाया... 
मगर कैसे कहूं...कोई शब्द ढूंढने पे भी नही मिलता... 
कैसे बयां करूं वो बात यहीं सोचने में कितने साल निकल गए...
तुमसे तो मैं सारी बातें  कर लेता हूं... हसीं मजाक रूठना मनाना... फ्लर्ट करना कुछ भी...
लेकिन वो तीन शब्द बोलने में मेरी रूह क्यों कांप जाती है...शरीर क्यों कपकपा सा जाता है... आखिर क्यों वो शब्द लफ्जों पे आते आते दिल की धड़कनें तेज हो जाती है...ठंड में भी पसीने आ जाते हैं... आखिर क्या प्यार का इज़हार करना इतना मुश्किल है... लेकिन हां मुश्किल है तभी तो मैं कह नही पाया शायद कभी कह भी ना पाऊं...काश ऐसा होता कि बिना कहे ही तुम समझ जाती की हम आपसे कितना प्यार करते हैं...काश आप ये समझ पाती की जब तुम साथ होते हो तो ऐसा लगता है सारी दुनिया मेरी मुट्ठी में हैं...काश ये समझ पाती की तुम्हारे एक इशारे पे आखिर में पागलों की तरह क्यों दौड़ा चला आता हूं...कितनी बार कोशिश की तुमसे मोहब्बत का इज़हार करूं लेकिन हो ही नहीं पाता... ये प्यार भी ना किसी चांद तारे से कम नही जिसे देख तो सकते...महसूस तो कर सकते हैं...लेकिन हासिल कोई भी नहीं कर सकता...मेरे प्यार को ना तो तुम कभी समझ सकोगी और ना तो शायद मैं कभी समझा पाऊं...क्योंकि मैं डरता हूं तुम्हें खोने से....


आशीष....

Monday, 28 October 2024

मत सोचो इतना कि हर पल ख़्याल मेरा ही आए...
नाम किसी और का लो और नाम मेरा ही आए...


आशीष

Tuesday, 8 October 2024

इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में... कितना उलझ गया हूं मैं...
नौकरी के चक्कर में...अपने शहर से कितना दूर हो गया हूं मैं...
जो पास हैं उन्हें शिकायत है कि... कितना बदल गया हूं मैं..
अब क्या बताएं उन्हें हम... की ख़ुद से भी कितना दूर हो गया हूं मैं...

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...