Tuesday, 31 December 2019

नया साल...

सोचते-सोचते कब शाम हो गयी, पता ही नही चला...
देखते-देखते पुराना साल कब नया साल हो गया, पता ही नही चला...

जब नया साल आ ही गया है तो, खुल कर खूब एन्जोय करते है...
दोस्तों क साथ मिलकर थोड़ी मुलाकात करते हैं...

पुरानी यादें, पुराने दोस्त, हमेशा की तरह आज भी वही रहेंगे...
नया दिन बदला है, नई तारीख बदली है...नया साल बदला है...
मगर हमारे दोस्ती निभाने का अंदाज़ हमेशा की तरह आज भी वही रहेगा...

शुक्रगुजार हैं हम उस ज़िन्दगी का, जिनसे ज़िन्दगी में एक नया मोड़ आया है...
मेरे लिए मेरे घर से, मेरे अपनो का प्यार आया है...

यह साल मेरे लिए कुछ खास बन रहा है...
आप जैसा दोस्त इस साल मिल रहा है...

कुछ दोस्त मिले तो, कुछ दोस्त बिछड़ गए इस साल...
कुछ सपने सच हुए तो, कुछ टूट गए इस साल...

वो दौर कुछ और था, ये दौर कुछ और है...
वो दिन कुछ और था, आज का दिन कुछ और है...

अब तो साल भी नया है, दिन भी नया है...
ज़िन्दगी को जीने का एहसास भी नया है ...

मंजिल भी नया है, रास्ता भी नया है...
अपने मुकाम तक पहुँचने के लिए, हमारा अंदाज भी नया है...

वो दिन भी आयेगा, जब दुनिया याद करेगी...
इस बन्दे को दुनिया सलाम भी करेगी...

आशीष गुप्ता....

Monday, 30 December 2019

नया साल....

सोचते-सोचते कब शाम हो गयी, पता ही नही चला...
देखते-देखते पुराना साल कब नया साल हो गया, पता ही नही चला...

जब नया साल आ ही गया है तो, खुल कर खूब एन्जोय करते है...
दोस्तों क साथ मिलकर थोड़ी मुलाकात करते हैं...

पुरानी यादें, पुराने दोस्त, हमेशा की तरह आज भी वही रहेंगे...
नया दिन बदला है, नई तारीख बदली है...नया साल बदला है...
मगर हमारे दोस्ती निभाने का अंदाज़ हमेशा की तरह आज भी वही रहेगा...

शुक्रगुजार हैं हम उस ज़िन्दगी का, जिनसे ज़िन्दगी में एक नया मोड़ आया है...
मेरे लिए मेरे घर से, मेरे अपनो का प्यार आया है...

यह साल मेरे लिए कुछ खास बन रहा है...
आप जैसा दोस्त इस साल मिल रहा है...

कुछ दोस्त मिले तो, कुछ दोस्त बिछड़ गए इस साल...
कुछ सपने सच हुए तो, कुछ टूट गए इस साल...

वो दौर कुछ और था, ये दौर कुछ और है...
वो दिन कुछ और था, आज का दिन कुछ और है...

अब तो साल भी नया है, दिन भी नया है...
ज़िन्दगी को जीने का एहसास भी नया है ...

मंजिल भी नया है, रास्ता भी नया है...
अपने मुकाम तक पहुँचने के लिए, हमारा अंदाज भी नया है...

वो दिन भी आयेगा, जब दुनिया याद करेगी...
इस बन्दे को दुनिया सलाम भी करेगी...

आशीष गुप्ता....

हैं मै स्त्री हूं...

हां मै स्त्री हूं...

मै ही तुम्हारा कल हूं... मै ही तुम्हारा भविष्य हूं...
मै ही पालनहार हूं...मै ही इस सृष्टि का निर्माण हूं...

मै ही मां हूं... मै ही बहन हूं...
मै ही पत्नी हूं...कियोंकी मै ही स्त्री हूं...

मै ही पेड़ हूं... मै ही छाव हूं...
मै ही पर्वत हूं... मै ही आकाश हूं...

मै कमज़ोर नहीं...मै लाचार नहीं...
मै कोई जीत नहीं...कोई हार नहीं...

मै ही त्याग हूं... मै ही बलिदान हूं...
मै ही शक्ति हूं... कयोंकि मै ही स्त्री हूं...

जो अग्नि से भी जीत जाए...वो ज्वाला हूं मै...
जो मृत्यु से भी लड़ जाए... वो नारी हूं मै...

ना टूटे कोई भी घर...ऐसी दीवार हूं मै...
जो सबको साथ लेकर चले... वो परिवार हूं मै...

जो कभी ना हो पराजित... वो अपराजिता हूं मै...
जो अपनों के लिए हर दर्द को भी सह जाए... वो स्त्री हूं मै....

आशीष गुप्ता....

Saturday, 14 December 2019

होंठों का जाम...

आज प्यासा हूं इतना कि पूरा मैखाना ही पी जाऊं...
मगर क्या करूं तलब तेरे होंठों के जाम की है...

आशीष गुप्ता

Sunday, 8 December 2019

मेरी मोहब्बत...

मेरी मोहब्बत हक़ीक़त है तुम गलत मत समझना
लेकिन हां ये सच है इसे झूट मत समझना
मैंने बड़ी सिद्दत्त से चाहा है और मांगा है तुम्हें
मेरी हर ग़ज़ल में ज़िक्र तेरा ही है किसी और का मत समझना...

आशीष गुप्ता...

तुम...

तुम्हें देखे तो हर समंदर की प्यास बढ़ जाए...
तुम्हारा नाम लिख दूं जिस पन्ने पे वो ख़ुद ही
किताब बन जाए...
तुम्हारी शोखियां, तुम्हारी शरारतें, तुम्हारी हरकतें,
हर किसी के दिलों पे राज़ करती है...
तुम्हें गर बादल भी देख ले तो बिन मौसम बरसात हो जाए...

आशीष गुप्ता...🙂🙂🙂..

इज़हार..


तुम्हें देखता हूं तो मेरी आंखें भी झुक जाती है...
क्या ये मोहब्बत नहीं है...
ना देखूं तो दिल भी तड़प सा जाता है...
क्या ये मोहब्बत नहीं है...
जरूरी है क्या की हर मोहब्बत का इजहार करूं...
कभी तुम भी मेरी खामोशियों को समझो...
जो खामोश होकर भी बहुत कुछ बयां कर जाता है...
सुना है तुम किताब पढ़ते है...
कभी मेरा चेहरा भी पढ़कर देखो...
आंखों में झांक कर देखो तो पता चलेगा...
की कितनी मोहब्बत है तुमसे...
तुम्हारे मोहब्बत के दरिया में इस कदर डूब गया हूं कि
ना तो इसका कोई किनारा ही मिल रहा है...
और ना ही कोई मंजिल...
हर तरफ़ बस तेरी यादों की तन्हाई है...

आशीष गुप्ता...

मेरी नज़र...

ये नज़र तुम पर क्या पड़ी...हर नज़र तुम पर ही जा गिरी...
तुम कहीं भी हो किसी भी जगह...ये नज़र ढूंढ लेती है तुम्हें हर जगह....
बार-बार तुम सामने आ जाते हो...बार-बार तुम नज़र से नज़र मिला जाते हो...
कुछ ना तुम कहते हो...कुछ ना हम कहते हैं...
बस नज़रों से बात करते हो...नज़रों से मुलाकात करते हो...

आशीष गुप्ता...

हवाओं का रुख...

आज कल हवाओं का रुख भी कुछ बेवफ़ा सा है...
आदमी की तन्हाई देखकर...मौसम अपना मिजाज़ बदलता है...
आशीष गुप्ता

Tuesday, 3 December 2019

मै निशब्द हूं....कियुकिं मै भी शर्मिंदा हूं...

आज सोचता हूं तो सहम सा जाता हूं...
लिखता हूं तो कांप सा जाता है...

ना तो शब्द ही है मेरे पास...
ना ही किसी शब्द का अर्थ ही है मेरे पास...

दिल में इतना गुस्सा भरा है कि कुछ कह ही नहीं पा रहा हूं...
अपने दर्द को भी ख़ुद से बयां कर ही नहीं पा रहा हूं...

बस एक आवाज़ है जो गूंजती है चिल्लाती है...
तड़पती है और बिखर जाती है...

उसने तो सोचा भी नहीं होगा कि उसके साथ क्या होने वाला है...
ज़िंदगी में उसके कितना बड़ा तूफ़ान आने वाला है...

उस काली रात को उनलोगों ने उसकी आख़िरी रात बना डाला...
26 साल की बच्ची 26 मिनट में हमेशा के लिए ही सुला डाला...

कैसे कैसे उस लड़की ने उस दर्द को झेला होगा...
उन कुत्तों ने कैसे कैसे उसके जिश्म को नोचा होगा...

कितना तड़पती होगी यार कितनी चिल्लाई होगी...
भाई भईया कह कर कितना गिड़गिड़ाई होगी...

इतनी हैवानियत तुम लाते कहां से हो...
इतनी वैहशियत तुम दिखाते कहां से हो...

भाई बनकर गए थे ना तुम शैतान बन गए...
इंसान तो तुम भी थे यार हैवान कियू बन गए...

हवस की इतनी ही भूक थी तो घर में ही निकाल आते...
गर इतनी ही हिम्मत थी तो अपनी बहन को ही जला आते...

आज मै दुआ करता हूं कि मेरी हर एक ख्वाहिश अधूरी हो जाए और बस एक ख्वाहिश पूरी हो जाए...
तुम हैवानों को इतना दर्द मिले की दर्द को भी दर्द का एहसास हो जाए....

आशीष गुप्ता...

तुम करोगे इश्क़... तब समझोगे... मोहब्बत क्या चीज़ होती है... हमने किया तो एहसास हुआ... ख़ुद बर्बाद करने की सज़ा क्या होती है.... आशीष