Friday, 17 July 2020

मैं...

हम वो रेत नहीं जिसे हर कोई मुठ्ठी में कैद कर सके....
हम तो वो आग का दरियां हैं जो पर्वत को भी पिघला देते हैं...

आशीष गुप्ता

तुम दूर चले गए...

जो कभी पास हुआ करते थे आज उनको दूर जाते हुए देखा है...
जैसे लहरों को समंदर को छोड़कर कहीं और जाते हुए देखा है...
जहां ज़िन्दगी के सफ़र में साथ देने का वादा किया था वहां खुद को मैंने अकेला ही पाया है...
आज हमने भी अनगिनत तारों के बीच उस चांद को रोते हुए देखा है...

आशीष गुप्ता

Thursday, 16 July 2020

आखिर कौन हो तुम...






आखिर कौन हो तुम...
जो मेरे ख्यालों में आ जाते हो...
मेरी नींदों को चुरा जाती हो...
क्या तुम कोई ख़्वाब हो...या कोई हक़ीक़त...
आखिर कौन हो तुम...
हर पल हर वक़्त बस... तेरा ही ज़िक्र होता है...
सुबह हो या शाम हो बस... तेरा ही फिक्र होता है...
ऐसा लगता है कि मै ख़ुद को ही भूल गया हूं...
ख़ुद से ही बातें करने लगा हूं....
आईना देखता हूं तो, तुम्हारा ही चेहरा दिखता है...
उस चांद को देखता हूं तो, तुम्हारा ही अक्स दिखता है...
ये कोई पागलपन है...या मेरी मोहब्बत...
रात की तनहाई में जब हवाएं, मेरे बगल से गुजरती है...
ऐसा लगता है तुम मुझे छू रही हो...
मेरे हाथों में तेरा हाथ होता है...
ज़िन्दगी के सफ़र में कुछ पल का साथ होता है...
वो सोकून देता है, तुम्हारे पास होने का...
एक एहसास देता है, तुम्हारे साथ होने का...
काश ये पल हमेशा के लिए ही रुक जाता...
सब कुछ वहीं थम सा जाता...
लेकिन ये तो बस एक ख़्वाब था...
जो हर बार की तरह आज फिर टूट गया...
फिर से तुम दूर हो गई...और मै फिर से टूट गया...

आशीष गुप्ता...

Tuesday, 23 June 2020

सोचता हूं...

सोचता हूं कि तुम्हें लिखूं...
फिर सोचता हूं कि आख़िर क्या लिखूं...

आशीष गुप्ता...................??😃

Monday, 15 June 2020

तनहाई

हर बात को दिल में दबा के रखने से क्या फायदा...
ज़िन्दगी मिली है जीने के लिए... यूं अकेले रोने क्या फायदा...
कोई अपना ना सही तो... खुद को ही हमसफ़र बना लो...
यूं टूट कर बिखर जाने से क्या फायदा...

आशीष गुप्ता...

Monday, 18 May 2020

खामोशियां

ज़रूरी नहीं कि हर बात का इजहार अल्फ़ाज़ से ही किया जाए...

कभी-कभी खामोशियां भी बयां कर जाती है अपने जज़्बात को...

आशीष गुप्ता...

Saturday, 9 May 2020

मां


इस दुनिया में जिसने मुझे...अपने पैरों पे खड़े होना सिखाया है...
उंगलियां पकड़कर जिसने मुझे... चलना सिखाया है...
जिंदगी की हर कठिनायों से मुझे डट कर... लड़ना सिखाया है...
वो मेरी मां ही हैं जिसने मुझे... जिंदगी को जीना सिखाया है...
उनके इस एहसान इस ममता को मै... ज़िन्दगी भर ना चुका पाऊंगा...
लूंगा सात जन्म लेकिन फिर भी... ना उतार पाऊंगा...

आशीष गुप्ता

तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....