Wednesday, 14 April 2021

मोहब्बत...

हम वो आशिक़ हैं.... जो हर किसी से मोहब्बत कर बैठें...
मोहब्बत में इतना दर्द मिला... तो ख़ुद से ही मोहब्बत कर बैठें....


Sunday, 11 April 2021

मोहब्बत...



मेरी मोहब्बत पे कीचड़ उछालने वालों...
कभी ख़ुद को आईने में देखा है क्या...
मैं जिस भी गली से गुज़र जाऊं उधर मोहब्बत की बरसात हो जाती है...
तुमने कभी आसमां को भीगते हुए देखा है क्या...

Saturday, 10 April 2021

मेरी ज़िन्दगी की डायरी...


ज़िन्दगी की डायरी में अल्फ़ाज़ बहुत थे... मगर फिर भी कुछ कमी सी थी...
सफ़र के इस दौर में हमसफ़र भी ख़ूब थे... मगर फिर भी कुछ कमी सी थी...

अचानक से ज़िन्दगी के पन्नों में कुछ सुगबुगाहट सी हुई...
किसी के आने की खबर लगी... और दिल में दस्तक सी हुई...

तुम्हारे आने से आज मेरी ज़िन्दगी की डायरी पूरी हो गई...
जैसे कोई अधूरी ख्वाहिश आज फिर से पूरी हो गई...

Friday, 9 April 2021

तुम...




एक ख़ूबसूरत सा शाम हो...तुम
मेरे ज़िन्दगी की सबसे प्यारी एहसास हो...तुम
जिसे देखते ही दिल में कुछ संगीत सा बज जाए...
ऐसे ही मोहब्बत की सरताज हो...तुम

जिसे छूते ही ख़ुशबू हाथों में बिखर जाए
नाम लेते ही उसका ग़ज़ल बन जाए
ऐसे ही एक ख़ूबसूरत सा किताब हो...तुम
जो हर दिल को छू जाए वो अल्फ़ाज़ हो...तुम





 

Tuesday, 6 April 2021

मोहब्बत....

सोचते सोचते आज सुबह से शाम हो गई...
ख़्वाबों में तुमसे आज थोड़ी सी मुलाक़ात हो गई
मेरे जिश्म में तेरे जिश्म कि ख़ुशबू घुली कुछ इस कदर...
हम भीगते रहे और मोहब्बत की बरसात हो गई...

Sunday, 14 March 2021

तुम बिन मैं अधूरा....


मैं तो ज़िंदगी को ज़िन्दगी की तरह जिए जा रहा था...
अंजान सफ़र में सफ़र किए जा रहा था...

मुझे क्या पता था कि... मैं भी किसी का शिकार हो जाऊंगा...
किसी के मोहब्बत में ख़ुद ही बर्बाद हो जाऊंगा...

बताऊंगा दास्तां तो हर एक दुश्मनों का नाम आएगा...
उन दुश्मनों से पहले मेरे दोस्तों का नाम आएगा...

जिनसे भी मैंने मोहब्बत किया था बेइंतहा किया था...
जान क़दमों में रख दिया था लेकिन उफ्फ तक ना किया था...

ख़ैर वो एक दौर था जो आज मैं भूल गया हूं...
तेरा साथ पाकर मैं ख़ुद को भूल गया हूं...

अब ज़िन्दगी के सफ़र में तुम ही मेरे हमसफ़र हो...
मोहब्बत भी तुम हो... इश्क़ भी तुम हो...मेरे रहगुजर भी तुम हो...

मैं कहीं दूर की बातें नहीं करता...
मैं कोई भी झूटे वादे नहीं करता...
मेरी मोहब्बत में इतनी सच्चाई है कि...
मैं यूं ही हावाओं में बातें नहीं करता....

मैं तो बस इतना कहूंगा...
मोहब्बत तुमसे बेशुमार है... बस इतना कहूंगा...
यक़ीन ना हो तो मेरे दिल की धड़कनों से पूछ लेना...
फिर भी यकीं ना हो तो उन चांद तारों से पूछ लेना...
जो रात भर तुम्हारे दीदार में पलकें बिछाएं बैठें हैं...
तुम आओगी छत पर ये उम्मीद लगाएं बैठें हैं...

तेरे इश्क़ ने हर किसी को दीवाना कर रखा है...
ख़ूबसूरती ने तुम्हारे हर किसी को पागल कर रखा है...

तुम्हारे आने से आज पत्थर से मोम हो गया हूं...
मैं अधूरा था तुम बिन देखो आज पूरा हो गया हूं...

Monday, 1 March 2021

मोहब्बत और तबाही...



ख़ुद तबाह होकर मुझे तबाह कर जाती है...
मोहब्बत कर के ख़ुद वो बेवफ़ा हो जाती है...
आज कल तो वो किसी और की हो रही है...
जमाने को खबर है और ख़ुद ही बेखबर हो जाती है...

जिसके हाथों में कभी मेरा हाथ होता था...
वो आजकल किसी और का हाथ थामे बैठी है...
जो कभी आराम से मेरे गोद में सोया करती थी...
वो आजकल किसी और की गोद में जा बैठी है...

उसकी मोहब्बत में कितने मासूम ख़ुद का शिकार कर बैठें हैं...
अपना घर छोड़कर किसी और का घर जला बैठें हैं...
तेरी मोहब्बत की हवा चली कुछ इस कदर...
हर शख़्स आज ख़ुद को बर्बाद कर बैठें हैं...




आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...