Tuesday, 25 April 2023

उन्हें देखे आंखों से कितने मुद्दतें बीत गई...
और वो हैं की कहतें है अभी तो मिले थे.......

आशीष गुप्ता...

दिल की बातें

आज कहूं जो दिल की वो बातें...तुमसे कभी जो मैं...कह भी पाया....
प्यार किया था जो तुमसे कभी मैं.... वो इज़हार कभी मैं कर नहीं पाया...
चुपके से चुपके से देखा था तुमको...आंखों से आंखे मिला नहीं पाया....
बचपन का प्यार हमारा था लेकिन जवानी में उसको भुला नही पाया...

Tuesday, 20 December 2022

घर से दूर....




जिंदगी में कौन खुश नही रहना चाहता...परिवार को छोड़कर बाहर कौन जॉब करना चाहता है...मगर कुछ मजबूरियां है कुछ ख्वाहिशें हैं...जिसके कारण लोग...अपनों से दूर कहीं अंजान शहर में रहने को मजबूर हो जाते हैं...जहां कोई जानने वाला नही...कोई पहचानने वाला नही...होते हैं तो बस किराए के कमरों के वो चार दीवार...और वो चार दीवार परिवार की कमी को कभी पूरा नही कर सकती...
कुछ लोग कहते हैं कि बाहर रहना ऐश की जिंदगी होती है...कोई रोकने वाला नही...कोई टोकने वाला नही... कुछ भी करो...कुछ भी खाओ... कहीं भी घूमों...मगर असल जिंदगी में ऐसा होता कहां है...
कुछ दिन की जगमगाती जिन्दगी कब अंधकार सी लगने लगती है कुछ मालूम नहीं पड़ता...
कहतें हैं ना...
जिंदगी जीने के लिए जिंदगी छोड़ आया हूं...
चंद पैसे कमाने के लिए घर छोड़ आया हूं...
एहसास तब हुआ जब घर से बहुत दूर निकल आया हूं... 
अपना घर छोड़कर किराए के घर में रहने आया हूं...

दोस्त, यार, प्यार, मोहब्बत, पैसा, कोई कितना भी साथ हो मगर परिवार से दूर रहना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है....


आशीष गुप्ता...

Friday, 1 July 2022

मोहब्बत

मोहब्बत है इतना की कैसे बताए तुम्हें हम....
खुद को भूल जाता हूं....जब याद आतें तुम....



Saturday, 23 April 2022

तेरी मोहब्बत में हम शरीफ से बदमाश हो गए...
बेकसूर तो हम भी थे गुनहगार हो गए...


Thursday, 31 March 2022

तेरा नाम लिख रहा हूं....

बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं लेकिन आज लिख रहा हूं...
मोहब्बत की पहली बरसात लिख रहा हूं...
बागों में जो महके वो खुश्बू लिख रहा हूं...
और उस खुश्बू से महकता हुआ शाम लिख रहा हूं...

Wednesday, 26 January 2022

सफ़ेद चादर...

आओ चलते हैं...कहीं दूर...बहुत दूर...
जहां कोई भी ना हो...
तुम हो हम हो...और ये ऊंची ऊंची पहाड़ की चोटियां...
जो बर्फ की चादर को लपेटकर...अपनी खूबसूरती का इजहार कर रही है...
दिल करता है... ख़ुद को भूल जाऊं...
और समा जाऊं...इन ख़ूबसूरत पहाड़ों के बीच में...

इन ठंडी हवाओं को सुनो ना...
जो पहाड़ों से टकराकर...
बर्फ की चोटियों से गुजरकर...
हमसे कुछ कह रही है....
हमें एहसास करा रही है अपने होने का...
इन ख़ूबसूरत वादियों से तो किसी को भी प्यार हो जाए...
लेकिन आसान कहां है तुमसे मोहब्बत करना...

आशीष गुप्ता...

तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....