Wednesday, 13 November 2019

मेरा इश्क़...

तुम्हें देखता हूं तो मेरी आंखें भी झुक जाती है...
क्या ये मोहब्बत नहीं है...
ना देखूं तो दिल भी तड़प सा जाता है...
क्या ये मोहब्बत नहीं है...
जरूरी है क्या की हर मोहब्बत का इजहार करूं...
कभी तुम भी मेरी खामोशियों को समझो...
जो खामोश होकर भी बहुत कुछ बयां कर जाता है...
सुना है तुम किताब पढ़ते हो...
कभी मेरा चेहरा भी पढ़कर देखो...
आंखों में झांक कर देखो तो पता चलेगा...
की कितनी मोहब्बत है तुमसे...
तुम्हारे मोहब्बत के दरिया में इस कदर डूब गया हूं कि
ना तो इसका कोई किनारा ही मिल रहा है...
और ना ही कोई मंजिल...
हर तरफ़ बस तेरी यादों की तन्हाई है...

आशीष गुप्ता...

Thursday, 7 November 2019

हमारा आशियाना...

तुम हमे इतना मत खोजों... हम कहीं और बसते हैं....
आशियाना है इतना कि... हम हर रोज़ घर बदलते हैं...
तुम ढूड़ते रहोगे मुझे...फिर भी हम तुम्हें नहीं मिल पाएंगे...
हमारे चाहने वाले ही हैं इतना कि... हम हर किसी के दिल में बसते हैं...

आशीष गुप्ता

तेरी मोहब्बत ने फिर से हमें अजनबी बना दिया...

तुम #अजनबी बनकर आए थे...
और मुझे अपना बना लिया...

देख तेरी मोहब्बत ने फिर से हमें...
#अजनबी बना दिया...

आशीष गुप्ता...

दोस्तों की मेहफिल ...

दोस्तों की मेंफिल थी
शाम भी रंगीन थी...

वो पल भी क्या पल था
जब सामने तू थी...

आंखों में नशा था
बातों में प्यार...

अब नाराजगी किस बात की
आ गले लग जा मेरे यार...

आशीष गुप्ता...

मोहब्बत...

जिंदगी में एक बार मोहब्बत किया तो, खुद से ही मोहब्बत कर बैठा...

मोहब्बत में इतना दर्द मिला की, लगा जैसे कोई गुनाह कर बैठा...

मोहब्बत से खुद को इतना दूर कर लिया था कि, मोहब्बत भी मुझे गवारा नहीं...

तुम्हें जब पहली बार देखा तो यार कसम से, फ़िर से मोहब्बत कर बैठा...

आशीष...

सपनें...

कुछ सपने हक़ीक़त भी नहीं होते...
मगर रात को सोने भी नहीं देते....

आशीष गुप्ता...

मोहब्बत...

मेरी मोहब्बत हक़ीक़त है... तुम गलत मत समझना...
लेकिन हां ये सच है...इसे झूट मत समझना...
मैंने बड़ी सिद्दत्त से चाहा है...और मांगा है तुम्हें...
मेरी हर ग़ज़ल में बस ज़िक्र तेरा ही है...तू किसी और का मत समझना...

आशीष गुप्ता...

तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....