हम मासूम थे, और हंसी के शिकार हो गए...
थोड़ा टेढ़ा होता तो, वजूद ही मिटा देता...
आशीष...😎😡
आज कल के मौसम का कुछ पता नहीं...
तुम्हारा क्या हाल है ये भी कुछ पता नहीं...
पता नहीं वहां कितनी सर्दी होगी...
यहां भी मौसम कब करवट ले ये भी कुछ पता नहीं...
Ash..
जिसको अपना बनाने में हमने पूरी जिंदगी लगा दी...
उसने सामने से हमें पहचानने से मना कर दिया...
बात ये भी नहीं कि वो हमें आज भूल गए...
बात ये हैं कि हमारे ही महफ़िल में हमें आने से मना कर दिया...
आशीष...
सबका दुखदर्द बांटते बांटते ख़ुद का ख्याल रखना भूल गए...
महफ़िल सजी थी हमारे लिए और हमें ही बुलाना भूल गए....
आशीष
तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....