Wednesday, 17 December 2025

आज कल के मौसम का कुछ पता नहीं...

तुम्हारा क्या हाल है ये भी कुछ पता नहीं...

पता नहीं वहां कितनी सर्दी होगी...

यहां भी मौसम कब करवट ले ये भी कुछ पता नहीं...

Ash..

Monday, 3 November 2025

जिसको अपना बनाने में हमने पूरी जिंदगी लगा दी...

उसने सामने से हमें पहचानने से मना कर दिया...

बात ये भी नहीं कि वो हमें आज भूल गए...

बात ये हैं कि हमारे ही महफ़िल में हमें आने से मना कर दिया...

आशीष...

Friday, 31 October 2025

सबका दुखदर्द बांटते बांटते ख़ुद का ख्याल रखना भूल गए...

महफ़िल सजी थी हमारे लिए और हमें ही बुलाना भूल गए....

आशीष

Tuesday, 9 September 2025

मन की थकान...जो नज़र नहीं आती...

कई बार हम लोगों को देखकर सोचते हैं कि उनकी ज़िंदगी कितनी आसान है—कोई चिंता नहीं, कोई परेशानी नहीं...लेकिन सच्चाई यह है कि हर मुस्कराते चेहरे के पीछे एक अनकहा दर्द छुपा होता है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता...हम अक्सर दूसरों की ज़िंदगी को उनके बाहर के व्यवहार से आंकते हैं, लेकिन जो थकावट दिल और मन में बसी होती है, वह किसी को दिखती नहीं। हर इंसान कुछ न कुछ झेल रहा होता है—कोई अपनों से बिछड़ने का दर्द, कोई आर्थिक संघर्ष, कोई आत्म-संघर्ष, तो कोई अपूर्ण सपनों की पीड़ा। ऐसे में किसी के साथ नरमी से पेश आना कोई अहसान नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे पहली शर्त है।

आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में लोग अपनी थकान और टूटन को छिपा कर चलना सीख गए हैं। वे मुस्कराते हैं क्योंकि रोने का वक़्त और जगह नहीं बची। वे मदद नहीं मांगते, क्योंकि डरते हैं कि कहीं लोग उन्हें कमज़ोर न समझ लें। ऐसे में यदि हम किसी को प्यार से देखें, एक मीठा शब्द कहें, थोड़ी सहानुभूति दिखाएं—तो वह उनके लिए सुकून की तरह होता है। हमें यह समझना होगा कि हर कोई एक अदृश्य बोझ ढो रहा है। किसी की पीठ पर कोई ज़िम्मेदारी है जो वह बर्दाश्त कर रहा है, तो कोई दिल में ऐसा दर्द लेकर जी रहा है जो उसे रात-रात भर जगाए रखता है।

इसलिए जब हम किसी से मिलें, तो उसे उसकी मुस्कान या चुप्पी से मत आंकिए। थोड़ा रुकिए, थोड़ा समझिए, और थोड़ी नरमी बरतिए। एक कोमल शब्द, एक सच्ची मुस्कान और थोड़ा-सा धैर्य—शायद यही किसी टूटे हुए मन की सबसे बड़ी दवा हो। दुनिया को बेहतर बनाने के लिए ज़रूरी नहीं कि आप बड़े काम करें; कभी-कभी बस किसी का दिल न दुखाना ही सबसे बड़ा योगदान होता है। आखिरकार, इंसान की सबसे बड़ी ज़रूरत है—समझा जाना, स्वीकार किया जाना, और बिना शर्त प्यार पाया जाना....

Tuesday, 22 April 2025

हर ख़्वाब हक़ीक़त हो जाए ...ये जरूरी तो नहीं...

हर मोहब्बत पूरी हो जाए ...ये जरूरी तो नहीं...

हम तुम्हें पसंद करतें हैं ...ये और बात है...

तुम हमें पसंद करो ...ये जरूरी तो नहीं...

आशीष....

Tuesday, 15 April 2025

हो भगवान से पूरी .. ऐसा कोई वरदान चाहिए...
मैं जब भी रहूं अकेला...मेरे हाथों में तेरे हाथ चाहिए...
हो जाए हमारी पूरी... कितनी भी ख्वाइशें...
जिंदगी मिले हज़ार मगर हर जन्म में बस साथ तेरा चाहिए....

आशीष के शब्द.....

Friday, 11 April 2025

मेरा लिखने का शौक़ और बढ़ गया...
जब से तुम्हें पढ़ने का शौक़ हो गया...

आशीष...

तुम्हें शायद कभी एहसास न हो... लेकिन मेरी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत आदत तुम हो... जब दुनिया की भागदौड़ मुझे थका देती है... तो तुम्हारा ख़याल.....