Wednesday, 20 January 2021

तू नाराज़ मत होया कर...

ये मेरे इश्क़... तू नाराज़ मत होया कर...
मोहब्बत तुमसे बेशुमार हैं... यूं शक ना किया कर...
ज़िन्दगी के सफ़र में... तू ही मेरा हमसफ़र है...
जान क़दमों पे रख दूंगा तेरे...थोड़ा ऐतबार तो किया कर...

मेरी ज़िन्दगी भी तुमसे हैं... मेरी सांसे भी तुमसे है...
मेरे चेहरे पे जो मुस्कान है...वो मुस्कान भी तुमसे है...
मोहब्बत तुमसे बेशुमार है...अल्फाज़ की ज़रूरत क्या है...
शब्द कम पड़ जाएंगे...इतनी मोहब्बत जो तुमसे है...


आशीष...

मंज़िल

क्या पता हमें किधर जाना है...
मंजिल कहां है... और किसे पाना है....
हमतो बस मुसाफ़िर है... अपने ज़िन्दगी के सफ़र का...
कदम जहां भी पड़े...हमें तो बस चलते ही जाना है ...

आशीष गुप्ता....🥰

Saturday, 21 November 2020

मोहब्बत...

आज लगता है दिल में किसी ने दस्तक दिया है...
दिल तो पहले भी धड़कता था आज कुछ ज़ोर से धड़का है...

आख़िर कौन हो तुम और कहां से आयी हो...
पहले तो कभी नहीं देखा कहीं जन्नत से अाई हो...

अब आ ही गई हो तो बैठो कुछ बातें करते हैं...
कुछ नहीं है तो मोहब्बत की ही बातें करते हैं...

सवाल तुम करोगी जवाब हमारा होगा...
नज़रों से तीर तुम चलाओगी हम जानते हैं शिकार हमारा ही होगा....

शिकार ही करना है तो एकबार अपने नशीली आंखों में मुझे डूब जाने दो...

मोहब्बत किया है तुमसे ये मेरे हमसफ़र... मोहब्बत में थोड़ा तो भीग जाने दो...

इश्क़ करूंगा इतना कि ख़ुद को भूल जाऊंगा...
जान क़दमों में रख दूंगा और तेरे इश्क़ में फनह हो जाऊंगा...


आशीष गुप्ता...

Friday, 20 November 2020

ख़्वाब

सपनों की दुनिया में...बहुत से ख़्वाब देखना अभी बाकी है....

कुछ ख़्वाब तो पूरे हो गए... कुछ हक़ीक़त करना अभी बाकी है...

आशीष गुप्ता....♥️

Thursday, 29 October 2020

ख़्वाब..

एक ख्वाब हक़ीक़त होना था वो ख़्वाब अधूरी रह गई...
ख़्वाब तो देखा था ख़ूबसूरत क्या करे रात ही छोटी हो गई...


आशीष गुप्ता...

Saturday, 10 October 2020

मोहब्बत...

कभी आज़मा के देख लेना....
कभी हमारी आंखों में झांक के देख लेना...
हर नशा फ़ीका ही निकलेगा हमारी मोहब्बत के आगे...
यक़ीन ना आए तो हमसे एक बार मोहब्बत कर के देख लेना...

आशीष गुप्ता...

मोहब्बत....


क्या कभी तुमने भी मोहब्बत किया है...नहीं ना...मैंने किया है मोहब्बत....वो मोहब्बत जो मेरे रूह में बस गई है... दीमक की तरह जो धीरे- धीरे मेरे जिश्मों को खाए जा रही है...उस पर कोई भी दवा असर नहीं करती...और जो असर करती भी है... वो है मोहब्बत... जो तुमसे किया है... तुम नहीं मिली तो ज़िन्दगी वीरान सी हो गई... बंजर जमीन की तरह... जो आज भी बारिश की एक बूंद के लिए सूरज की रोशनी में ख़ुद को तपा रहा है...जिसमें तुम्हारी मोहब्बत की एक बूंद गिर जाए तो शायद जीने की एक उम्मीद जाग जाए...आज भी मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं...तुम्हारी राह देख रहा हूं... मुझे यकीन है तुम आओगी... लेकिन ये भी अब एक ख़्वाब लगता है...जो हर रात को मेरी नींदों में आ जाता है और फिर सुबह होते ही टूट जाता है... मैं जानता हूं तुम हक़ीक़त नहीं हो... लेकिन बस एक ख्वाहिश है मेरी... मैं तुम्हें जीभर के देखूं...तुझे प्यार करूं... तुझे छू कर महसूस करूं...फिर तुम्हें भी एहसास होगा मेरी मोहब्बत का... जो तुमसे बेइंतहा है... इतना कि... जैसे बिन बादल बरसात अधूरा है वैसे ही तुम बिन मैं भी अधूरा...
मेरी धड़कन आज भी तेरा नाम सुनते ही ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगता है...आज भी मेरी आंखें तुम्हारे दीदार में पलकें बिछाएं कब से तेरी रह तक रही है... मैंने आज उन कमरों को एक कर दिया है...जहां हम दोनों के बीच में एक दीवार हुआ करती थी... पूरे घर को तुम्हारी मोहब्बत की रोशनी से सजा रखा है... घर के चौखट आज भी तुम्हारे क़दमों की आहट सुनने को बेताब है...

आशीष गुप्ता...

आज लिखने का मन नहीं था... लेकिन किसी की याद ने फिर से दस्तक दे दी... सोचा था आज ख़ामोश ही रहूंगा... मगर उनकी यादों ने फिर से एक ग़ज़ल ही लिखवा...